उत्तरा खंड में पानी के सैलाब ने हजारों ज़िन्दिगियां तबाह कर दी . तीर्थ यात्रा पर देश के कोने -कोने से गए लोगो ने मौत का खौफ़ नाक मंज़र देखा जिसमे कई लोगों के लिए ये जिंदिगी का आखरी सफ़र साबित हुआ । लोग अपने -सामने बेबसी से अपनों को मौत के मुह में जाते हुए देखते रहे . सब कुदरत के क़हर के आगे मजबूर थे .....इस मुसीबत का मुक़ाबला करने के लिए जिसने सबसे ज्यादा हौसला दिखाया, वो है इंडियन एयर फ़ोर्स के जांबाज़ जूझारू सिपाही जो दिन- रात उत्तरा खंड में फसें लोगो को अपनी जान पर खेल कर बचा रहे है.... बिना थके ... बिना रुके ..... अपने इस नेक मिशन को पूरा करने में लगे हुए हैं
अपने साथी सिपाहियों के हेलीकाप्टर क्रैश में मारे जाने के बाद भी उनके हौसलों में कोई कमी नहीं आयी है , उनकी आखों में भी अपने साथियों को खो देने का ग़म है लेकिन फिर भी वो अपना फ़र्ज़ नहीं भूले हैं ।
और दूसरी तरफ हैं हमारे देश के गैर ज़िम्मेदार नेता .... जिन्हें अपने फायदे के अलावा कुछ और सूझता ही नहीं है ....... बहुत अफ़सोस होता है , बहुत शर्म आती है ....... अपने देश के ऐसे नेताओ पर .....जिन्हें जनता के दुःख से कोई लेना देना ही नहीं है , ये देश की बेहतरी के लिए क्या करेंगे .... ऐसी दुःख की घड़ी में भी सियासत करने से बाज़ नहीं आ रहे हैं .... कौन सी पार्टी ने लोगों को बचाया , इसका श्रेय .... लूटने में लगे है ... इन्हें देश के बारे में सोचने की फ़ुर्सत कहां है?
जब भी देश पर या देश के किसी हिस्से में कोई मुसीबत आती है ... तो इन्ही जांबाज़ जूझारू सिपाहियों को भेजा जाता है ..... हालात का मुक़ाबला करने। ये अपनी नीदें गवां कर हमें चैन से सो जाने की आज़ादी देते हैं और जब वतन और हम वतनो के लिए मर- मिटने की बात आती है तो हँसते- हंसते अपनी जान नयो छावर कर डालते हैं .
सबसे ज्यादा इज्ज़त , सबसे ज्यादा अहमियत , सबसे ज्यादा प्यार और सहूलियतें पाने के सच्चे हक़दार यही जाबाज़ वतन के रखवाले हैं जिनके लिए देश की हिफाज़त सबसे ऊपर है और देश के लिए जो कुर्बानी ये देते है वो कोई और नहीं देता .अरशिया ज़ैदी