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22 Dec 2012

insaaf ka intizaar


                                   इंसाफ  का इन्तिज़ार 

फिछले  हफ्ते  वो  गैंग  रेप  का शिकार हुई  और अब  हॉस्पिटल में  जिंदगी  और मौत  के बीच जंग  लड़  रही  हैबेहद  तकलीफ़  में  है ,उसके पेट और चेहरे पर  गहरी  चोटे आयी  है .पाँच सर्जरी के बाद भी  उसकी हालत नाज़ुक  बनी  हुई  है। 
उसे  और उसके दोस्त  की बहादुरी  को  हमारा  सलाम  जिन्होंने  आख़िर  तक  उन  हैवानों  का मुक़ाबला  किया। आज  उनके  साथ  हुई  हैवानियत   के  खिलाफ   पूरा  देश  उनके  साथ  खड़ा है , इंडिया  गेट , राज पथ ....पर  हज़ारों  की  भीड़   इकठ्ठा  होकर  उनके  लिए  इंसाफ मांग रही हैं    
सब  उसके  ठीक  होने  के लिए  दुआ  कर रहे है ,.....   वो एक  fighter  है,  ठीक  होकर  इज्ज़त और  शान  के  साथ  अपनी ज़िन्दगी  जियेगी.....उसकी  ज़िन्दिगी  पहले से ज़्यादा  ख़ूबसूरत  और  कामयाब हो .... यही  हम सब की दुआ है .
जो  उसके  साथ हुआ  वो बेहद  दर्द नाक  और दिल को हिला  देने वाला हादसा  है, जिसके  लिए कोई  सज़ा  काफी  नहीं . ऐसे   गुनाहगारों  को  हर  दिन  तिल - तिल   मरने की सजा मिलनी   चाहिए. इन्हें इस  लायक  ही  नहीं  छोड़ना चाहिए  की  ये  फिर  किसी  लड़की  से sexual relationship  बना  सकें। इनको  मिलने  वाली सज़ा  इतनी दर्द  नाक होनी  चाहिए  जो  लोगो  को  हिला  कर  रख  दे  और एक ऐसा डर  पैदा  कर  दे  की  कोई भी  ऐसी   हरक़त  करने   की सोंच  भी न सके . जब तक लोगो के अंदर  डर  नहीं होगा ....  ऐसे क्राइम   बार  - बार  होते रहेंगे  और  गुनाह गार  बेखौफ़  होकर सड़को  पर  घूमते  रहेंगे 

 सबसे   बड़ी  कमी  तो हमारे   सिस्टम की  है  जिसमे  सरकार , प्रशाशन  और  पुलिस   जो  अपनी   ज़िम्मेदारी  ठीक  से  नहीं  निभाते .... और पब्लिक  की  हिफाज़त  करने में पूरी तरह  नाकाम है .     वही  हमारी  सोंच  भी  कोई  कम ज़िम्मेदार  नहीं  है क्योकि  हम हर हाल  में  औरत को  ही  दोष  देते  है , उसकी  ही  ग़लती  निकालते है .... रेप  केस  में   हादसे  की शिकार   लड़की को  बेहद  insensitivity  से  डील  करते  है।..... जैसे  गुनहागार  वो  लड़की  ही हो . यहाँ  हमें भी   अपनी  सोंच बदल कर  ऐसे केस  में  औरतों  के साथ बेहद प्यार, इज्ज़त और हमदर्दी  भरा  सुलूक  करने  की  ज़रुरत  है .... ताकी वो  जल्दी  से  जल्दी उस trauma से बाहर  आ  सकें 
 ये  पहला  रेप  केस  है  जिस  पर  इतनी  तवज्जो  दी जा रही है..... औरतो  की हिफाज़त  के  लिए ठोस   क़दम  और  कड़े  कानून बनाने  की  बात  चल रही है .....( काश  अमल भी हो !)..अब  देखना  ये  है  की अमल  कैसे  और  कितना  किया जाता है  जिससे   देश  भर  की  लडकियां  महफूज़  हो  सकें  और बेफिक्र  होकर ... बिना किसी  डर  के सड़को  पर निकल  सकें .
अरशिया  ज़ैदी