20 Jun 2014

Pari ki Farmaish

                                                       परी की फ़रमाइश 



मैं  गहरी नींद  में  थी  अचानक   छोटे- छोटे  मुलायम हाथो  ने  मेरे गाल   को छुआ। … मेरी आँख खुल गयी  सामने  देखा  तो  मेरी  नन्ही  भतीजी   परी  स्कूल की   वाइट  और ब्लू  ड्रेस  पहने  मेरे सामने  खड़ी है।  उसके  प्यारे  चेहरे  को   देखते ही  मेरी  नींद  ग़ायब  हो  गई  …


"फुफ़ ीजान  मुझे  बाय  कहने  गेट तक नहीं चलेंगी"  वह  उछलते  हुए  बोली। 
 मैंने उसके  गाल  पर  प्यार किया  और  उससे  कहा
"क्यों  नहीं  जाउंगी  मैं  अपनी  परी  को  गेट तक छोड़ने? " उसे  गोद  में  लेकर  मैं  गेट  पर   आ  गई  और  हम  दोनों  स्कूल-  वैन  का इन्तिज़ार  करने  लगे।

लॉन  में लगे चीड़  के पेड़  से  बहुत  तिनके गिरते है   जिससे   लॉन की  हरी -हरी  घास   पर  कूड़ा  सा नज़र  आने लगता है। ..  अचानक  परी   लॉन में बिखरे  हुए तिनके बीनने  लगी  … और मुझसे  कहने लगी। ....
"फुफ़ ीजान इस ट्री से  तिनके  बहुत गिरते हैं , मैं  बीनते - बीनते  थक  जाती हूं  "

 मैंने परी  से कहा  "बेटा  मैं  साफ़  कर  दूंगी "  .... अभी  हम बात  ही  कर  रहे थे   की  परी  की     स्कूल  वैन  आ गयी। …

परी  वैन में बैठ  गई, हाथ  हिला कर  बाय  कहा  और  चिल्ला  कर  बोली
" फुफ़ ीजान आप मुझे स्कूल से लेने आइयेगा"


 परी की बात  कैसे टाली  जा सकती थी  लिहाज़ा  मैं  अपनी   बहन हिना  और  भाई  अली ( शैली ) के साथ  ठीक 12 बजे  परी  के सेंट अल्फोंसस स्कूल लेने  पहुंच गयी। । गेट  खुलने  में कुछ  मिनट बाक़ी थे  इसलिए  हम गेट के  बाहर खड़े  होकर  गेट खुलने का इन्तिज़ार  करने लगे। वहां  खड़े होकर हमें  भी अपने स्कूल  के   वो प्यारे दिन  याद   आने  लगे  थे ।  चंद  मिनट  बाद गेट खुला , अंदर घुसते  की एक  ताज़गी  और  पाजिटिविटी  का  एहसास  हुआ  और   ख़ूबसूरत  जिंदिगी के  अलग  अलग  नज़ारों  का  लुत्फ़  लेते  हुए     हम  परी  के क्लास की तरफ़  बढ़ने लगे। …


हर  तरफ़  छोटे -छोटे  बच्चे  अपना स्कूल बैग  पीठ  पर   लादे   भागे  जा  रहे थे,  उन्हें   देख कर   ऐसा  लगता था  जैसे   मुर्ग़ी- ख़ाना  खुल गया  है  जिसमे  से छोटे- छोटे   प्यारे -प्यारे मुर्गी के बच्चे  निकल कर  इधर- उधर  भाग रहे  हैं ।

 हम परी के क्लास  में जा  पहुंचे , सब बच्चे  एक  से  ही लग रहे थे  जो  इधर- उधर   भाग  रहे थे। मुझे  इतने  बच्चो  में  परी कहीं नज़र नहीं  आई।  इतने  में  मुझे  अपना  कुर्ता   खिचता   सा   महसूस  हुआ , नीचे   देखा, तो  परी  मेरा  कुरता खींच  कर  मुस्कुरा रही  थीं ।.. पसीने से भीगा  चेहरा , सेब की तरह लाल -लाल  गाल , छोटी सी पोनी और  शैतानीं  से  भरी हुई  आखें  थीं  परी  की।

परी  क्लास  में  ज़ोर- ज़ोर  से  अपने  दोस्तों  को पुकार रही थी , उनके पास जा कर  हमारी तरफ इशारा कर रही थी , शायद  जैसे  अपने   दोस्तों को ये बताना चाहती  हो  … की  देखो।   मेरे  घर  से कितने सारे लोग मुझे लेने  आएं हैं
परी  स्कूल  ग्राउंड  में दौड़  लगा रही थी  उसके नन्हे -नन्हे पैर  जैसे रुकने का नाम   ही  नहीं ले रहे थे
 उनके   नन्हे  कंधो  से  स्कूल  बैग   हमने अपने  हाथों  में  ले लिया   था  ताकि  वो  भारी  बैग  के  बोझ  से   आज़ाद  हो  सके और  हम  उसे  हंसता -खिलखिलाते  देख  कर  ख़ुश  हो  सकें।


 अब  हम गेट के  बाहर आ चुके थे।  सामने  आइसक्रीम  वाले को देख  कर  परी  ने  आइस  क्रीम खाने की  फरमाइश  की  वो  भी  ऑरेंज  फ्लेवर ,हम  लोगो  ने  अपनी-  अपनी आइस क्रीम  का  तो  पूरा  मज़ा लिया   ही और  अपनी आइसक्रीम  ख़त्म करने के  बाद  हमारी नज़र  परी  की  आइसक्रीम  पर थीं  जो  आहिस्ता - आहिस्ता अपनी  आइस क्रीम खा रही थी  उनकी आइस - क्रीम भी हम लोगो  ने   खाई।

 इस  प्यारी  सी  बच्ची  की  ख़ासियत  ये है  की  वह  शेयर  करने में  ज़रा  भी  नहीं  हिचकिचाती।  न  तो   चिढ़ - चिढ़  करती  है न ही  रोती  है  बस   अपनी  मासूम  सी   मुस्कुराहट  से  सबको  अपना  दीवाना  बना लेती है। ख़ुशी -ख़ुशी  स्कूल  जाती  है , अपना  होम वर्क करती  है   और सुबह -सुबह  स्कूल  वैन  का इंतिज़ार करते  हुए  अपने  दादा ( जिन्हे वो प्यार से  अददा कहती हैं ) ढेरों  सवाल  पूछती  रहती  हैं




आइसक्रीम  ख़त्म  करके  मैंने परी  को  अपनी  गोद  में  लिया  हम सब  कार में बैठ  गए    मैंने कई बार  नोटिस  किया  है  कि  पता नहीं  क्यों  कार  या  बाइक  पर  बैठते  ही परी बिलकुल खामोश सी हो जाती है.  शायद  पेट्रोल  की   स्मैल  से  उसे प्रॉब्लम  होती है.


15 मिनट  में  हम  घर  पहुंच  गए  , गेट  पर   उनकी  मम्मी    उसका  बेचैनी  से इन्तिज़ार  कर  रहीं थीं  कार  से  उतर कर  परी अपनी मां से चिपट गयी और  उन्हें  जल्दी -जल्दी स्कूल की   सारी  बातें  बताने  लगी। हम लोग  उनकी  बातें  सुन कर  मुस्कुरा दिए।






अरशिया  ज़ैदी

  

26 Apr 2014

Talkhiyaan

                                            तल्ख़ीयां 

यूं  अजनबी सा बनके , 
हर बार तू मिलता रहा
 yoon ajnabi sa banke , 
har baar tu milta raha 
एक रंज, और घुटन का , एहसास  दिल  करता  रहा.
Ek ranj aur ghutan ka 
aehsaas dil karta raha. 

करती रहीं  नम  पलकें  मेरी, 
 वो  तल्ख़ीयां   तेरी.....
karti gayein nam palkein meri 
vo talkhiyaan teri 
फिर  भी  न  दिल से  कर सके 
 चाहत  कम  तेरी
Phir bhi na dil se kar sake
 chahat kam teri

रूखा  तेरा अंदाज़  
बयां  करता  रहा  एक फासला
Rookha tera andaaz 
bayaan kerta raha ek phasla
फिर  भी  न  जाने  कौन सा 
देखा  किये  हम आसरा.
Phir bhi na jane   koun   sa
 dekha kiya hum aasra  

जज़्बात में उलझ  कर  
दिल का  कहा  जो माना.
Jazbaat mein  ulajh kar 
Dil ka kaha jo maana 
ये  जुर्म  था  हमारा  
जो  आज  हम ने जाना .
Ye jurm tha hamara 
jo aaj hum ne jaana.

 अरशिया  ज़ैदी 

17 Oct 2013

Black Eid

                                           वो  काली ईद 
 इस  बार  मैंने  ईद उल  अज़हा   नहीं  मनाई , न ही  अच्छे  कपडे  पहने और  न  ही  कोई  पकवान  बनाये।  सच तो ये  था की  कोई  खुशी   मनाने  का  दिल  ही  नहीं  चाहा , दिल  चाहता  भी  तो  कैसे ,  मुज़फ्फर नगर  में  मज़हबी  दंगो के  शिकार  हुए  तक़रीबन 100000  हम  वतनों  की  तो  ये  काली  ईद  थी , जिसे  वो  अपने  घरों  से  बेघर  होकर  अलग - अलग  गैर सरकारी राहत  शिविर में,  आँखों  में  आँसू  लिए  मना   रहे  थे.  
ये  वो ईद है  …. जब  कोई   दंगो में  मरे  अपने भाई को  रो रहा है। … तो  कोई  बाप अपने जवान  बेटे को।  कोई   नई- नवेली  दुल्हन  जिसके सुहाग की मेहदी  भी  फीकी  नहीं  पड़ी  है  वो  इन  दंगो  में   बेवा  होकर अपनी क़िस्मत  को रो रही है. मज़हबी दंगो  में  फैली  नफ़रत में  गैंग  रेप की  शिकार  हुई  उन  मासूम  लडकियों  की  कैसी  ईद , जिनकी  अस्मत  इन  दंगों  की  भेंट  चढ़ गयी।   

जब  भी  इस तरह के दंगे होते हैं  तो न तो  किसी हिन्दू कि मौत होती है और न ही किसी  मुस्लिम   की , मौत होती है  तो इंसानियत  की। …  जो सिसक -सिसक के दम तोड़ देती   है। वो   दोस्त  और पड़ोसी   जो रिश्ते दारो से  भी  ज़यादा  क़रीब  हुआ करते   थे , जिनके साथ हर  वक़्त का खाना - पीना , उठना  -बैठना  होता  था अचानक  मज़हबी  नफ़रत  उन्हें एक -दुसरे  के  ख़ून   का  प्यासा  बना  देती है। 
नफरत के  बीज  बोने वाली  सियासी  ताक़तें  आम  लोगो  को  मज़हब  के नाम पर गुमराह  करती है। । लोग  उनकी बातों  में आ जाते  हैं और एक दुसरे  को मारने - मरने  पर  उतार  जातें हैं,  और  फिर खेल शुरू होता है  वोट बैंक का, जिसे सियासी पार्टियां  किसी  भी  तरह  बढ़ाना चाहती  हैं। 
मुज़फ्फरनगर  में  पहली बार  ये मज़हबी दंगे  भड़के , जिसकी आग  गांवों  तक जा  पहुँची है  जो की  आने वाली  किसी  बड़ी तबाही  की तरफ  इशारा  है  क्योंकि  जब गावों के  गावों  जलने शुरू हो जाते हैं   तो   नफरतों  की आग को  बुझाना बड़ा  मुशकिल  हो जाता  है , वहाँ  रहने  वालों  का कहना  है  की  ये दंगे  minorities   को  निशाना  बना कर किये गए थे। जब उनके घर जलाये जा रहे थे  और  उन्होंने पुलिस से मदद  मांगी  तो  पुलिस और  एडमिनिस्ट्रेशन ने  ये कह कर  मदद  करने से इंकार कर दिया की  "अभी  हमारे पास टाइम  नहीं  है, जब टाइम होगा  तब आयेंगे।"
बेहद  दुःख की  बात ये  है  की  दंगो  के दो महीने  बीत  जाने के बाद भी ये परेशान हाल लोग   ऐसे  बदहाल  राहत -शिविरो  में  पनाह  लेने  के लिए मजबूर  है , जहां  बुनियादी  सहुलियते  भी  मुहैया  नहीं कराई गयी है, उनके ज़ख्म  कैसे भरेंगे जब  तक  सरकार की तरफ़ से  उनको  फिर से बसाने   के   पुख्ता  इंतिज़ाम  नहीं किये जायेंगे।  दिल  के ज़ख्म  तो भरने से रहे … कम से  कम  सरकार  उन्हें भरपूर  राहत   तो दे.…  ताकि उनकी रोज़ मर्रा  की  ज़िन्दिगी  फिर  से   शुरू  हो सके. 

 अरशिया  ज़ैदी  































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14 Oct 2013

Dua


             दुआ.....  

 मैंने उस रात  एक खुआब  देखा था
 तुम किसी हादसे में घायल हुए हो.
 सुबह  जब आँख  खुली तो मैंने तुम्हे  फ़ोन  किया
 पता  चला  तुम्हे  सच में  चोट  आयी है.
 Maine us raat  ek khuaab dekha tha 
 Tum kisi  haadse mein ghayal hue ho
 Subah jab aankh khuli , to maine tumhe phone kiya
 Pata chala tumhe sach main chot aayee hai. 

 ये  सुन  कर  मेरा  दिल तड़पने लगा
 तुमसे मिलने , तुम्हे देखने का दिल, करने लगा
 मैं  तुमसे  दूर  हूँ  ....  बहुत दूर , आ  नहीं  सकती।
 ये   वो    फ़ासला  है  जो  तय,  नहीं कर सकती। 
Ye sun kar mera dil  tadapne laga 
Tumse milne , tumhe  dekhne ka dil kerne laga,
Main tumse door hoon, bahut door,aa nahi sakti
Ye wo phasla hai jo tay nahi kar sakti

 मगर  सुना है कि दुआओं  में  बड़ी ताक़त  है 
 इसलिए  मैंने  भी  दिन- रात दुआएं  मांगी  है   
 मुन्तज़िर  हूं  कि जल्दी मुझे  ख़बर  ये मिले
 करम  मौला का  हो , और   तुम्हें   दर्द से निजात मिले।
 Magar suna hai  ki  duaao main  badi taqat hai 
 Isliye  maine bhi din raat duaein mangi hain
 Muntazir hoon ki jaldi mujhe  khabar ye mile
 Karam maula ka ho aur, tumhe dard se nijaat mile. 

अरशिया   ज़ैदी(Arshia Zaidi)  




27 Jun 2013

देश के बहादुर सिपाहियों को सलाम ......




उत्तरा खंड  में  पानी के सैलाब  ने  हजारों   ज़िन्दिगियां तबाह कर  दी .  तीर्थ  यात्रा  पर देश के कोने -कोने  से  गए  लोगो  ने  मौत  का  खौफ़ नाक  मंज़र  देखा जिसमे कई  लोगों   के  लिए  ये  जिंदिगी  का आखरी सफ़र  साबित हुआ । लोग अपने -सामने  बेबसी  से  अपनों  को  मौत  के   मुह   में जाते  हुए  देखते  रहे . सब  कुदरत के  क़हर   के आगे  मजबूर  थे .....
  
इस मुसीबत का   मुक़ाबला करने  के लिए  जिसने सबसे ज्यादा हौसला दिखाया,   वो  है   इंडियन   एयर  फ़ोर्स  के   जांबाज़ जूझारू सिपाही जो  दिन- रात  उत्तरा खंड में  फसें  लोगो  को   अपनी जान  पर खेल कर  बचा रहे है.... बिना थके ... बिना रुके ..... अपने    इस  नेक मिशन  को   पूरा करने  में लगे हुए  हैं 
अपने साथी सिपाहियों  के हेलीकाप्टर  क्रैश  में  मारे  जाने के  बाद  भी   उनके  हौसलों  में  कोई  कमी  नहीं  आयी  है , उनकी  आखों  में भी  अपने  साथियों  को खो देने  का  ग़म   है  लेकिन फिर  भी  वो   अपना फ़र्ज़  नहीं भूले  हैं ।
और दूसरी तरफ   हैं  हमारे  देश  के गैर ज़िम्मेदार  नेता ....  जिन्हें अपने फायदे के अलावा कुछ और  सूझता ही नहीं है ....... बहुत अफ़सोस होता है , बहुत शर्म आती है .......  अपने  देश  के  ऐसे नेताओ  पर .....जिन्हें  जनता  के  दुःख  से  कोई  लेना  देना ही नहीं  है , ये  देश  की  बेहतरी  के  लिए   क्या  करेंगे ....  ऐसी  दुःख की  घड़ी में  भी सियासत  करने से बाज़ नहीं  आ रहे  हैं .... कौन  सी  पार्टी  ने  लोगों  को  बचाया , इसका   श्रेय .... लूटने  में लगे  है ...  इन्हें  देश के बारे में  सोचने  की   फ़ुर्सत  कहां  है?  

जब  भी  देश  पर  या  देश  के  किसी  हिस्से में  कोई  मुसीबत  आती है ... तो   इन्ही  जांबाज़  जूझारू  सिपाहियों को  भेजा जाता है ..... हालात  का    मुक़ाबला करने। ये  अपनी  नीदें  गवां कर  हमें   चैन से  सो जाने  की  आज़ादी देते  हैं   और जब   वतन  और हम वतनो के  लिए मर- मिटने  की  बात आती है  तो   हँसते- हंसते   अपनी जान   नयो छावर  कर  डालते  हैं .    
 सबसे ज्यादा  इज्ज़त , सबसे  ज्यादा अहमियत , सबसे ज्यादा  प्यार  और   सहूलियतें   पाने  के  सच्चे हक़दार  यही जाबाज़ वतन  के रखवाले  हैं   जिनके लिए देश  की  हिफाज़त  सबसे   ऊपर है   और  देश के लिए जो   कुर्बानी ये  देते   है  वो  कोई  और नहीं देता .

अरशिया ज़ैदी  


28 Feb 2013

aaj mera hai tu

       

 आज  मेरा है तू …………….

 मुझे  नाज़  है ख़ुद  पर 
 आज मेरा है तू 
 मेरे आसमां  का 
 झिल मिल  सितारा  है तू.

 मेरे  इन लबो की 
 मुस्कराहट है तू
 तपती धूप  में 
 घने पेड़ का  साया है तू.


 कल तुझको खो  दूंगी 
 ये जानती  हूँ  मैं 
 बेबस सी  तड़प कर 
 रह जाऊंगी  मैं.

 तुझसे न कभी फिर  कुछ  
 कह पाऊंगी  मैं 
 कैसे ये सज़ा  ख़ुद  को 
 दे पाऊंगी मैं.

 अरशिया  ज़ैदी  

14 Feb 2013

Happy Valentine Day


                           हैप्पी  वलेंटाइन  डे 

''मोहब्ब्बत  के  लिए  कुछ  ख़ास  दिल मख़सूस  होते हैं 
ये  वो नग़मा है जो हर साज़ पे गाया  नहीं जाता .'' 

 आज   वेलेंटाइन  डे  है . अपने  प्यार को  इज़हार करने का दिन  है  मोहब्बतें  देने  और  मोहब्बत    लेने का दिन है   इस  दिन  अपने प्यार का इज़हार  करने की खुली छूट होती है  ....मोहब्बत कुबूल हो जाये  तो  क्या कहने ....  और अगर  खुदा न ख़स्ता   बात  न  बन पाए  तो कोई बात नहीं ... साल  में  जिस दिन आपका  प्यार  आपको  मिल  जाये  समझ  लीजिये  वही  दिन आपका  वैलेंटाइन  डे  है .

आप  बहुत   ख़ुश  नसीब  है   अगर   आप को   जिंदिगी  में  सच्ची  मोहब्बत   मिली है .. एक ऐसा  साथी   मिला  है जिसका साथ .....  आप को   हर  वक़्त महफूज़  होने का अहसास कराता है  उसकी मोहब्बत की  खुशबू   आपको   लम्हा -लम्हा  खिला- खिला  सा महसूस  कराती   हैं।   जब  वो   आपके  पास  होता है  तो आपको  ये  ज़मी  चाँद  से   भी   ज़्यादा   हसीं  नज़र  आने  लगती है   और कई  बार  वो,  आपके  पास  न होकर  भी  आपके  बेहद  क़रीब  होता  है . 

 आपके   जज्बातों  से  उसका इतना  गहरा  ताल्लुक़   है  की  वो आपका  चेहरा  देख कर,  आपकी आवाज़ सुन कर  ही  आपके दिल की हालत का अंदाजा लगा  लेता  है  .... और  आपके  बताने   से पहले  ही  आपसे   पूछ  बैठता  है ..... "की बताओ क्या बात है ... क्यों  परेशान हो ". वो आपकी परेशानियां , आपकी उलझनों  को  अच्छी  तरह  समझता है  और  आप  पर  ज़बरदस्ती  अपना  नज़रिया , अपनी  सोंच   कभी   थोपना  नहीं चाहता , उसकी हमेशा  यही कोशिश  होती है  की वो  आपके  किसी दर्द की वजह  न बने।  


 आपके और उसके रिश्ते  में  इतनी गहराई   और समझदारी हो  जहां   झूठ  और  धोखे  की गुंजाइश  ही न रहे  और बड़ी से  बड़ी बात  भी बहुत छोटी  लगे . वो आपकी  एहमियत  को समझे और  कभी भी  आपकी  शख्सियत  को नज़र अंदाज़  न करे।

  वो  आपकी  जिंदिगी  में  एक ऐसा  ख़ास  इंसान हो  जिससे  डांट  खाना   आपको अच्छा लगे   और उसकी नाराज़गी  आपको  बैचेन  कर दे।  उसकी  खुश  देख कर  आपका दिल  ख़ुशी  और  सुकून  से भर जाये  और   जिसका  साथ  आपको बेपनाह   सुकून दे . अगर  आपकी जिंदिगी   में  ऐसा  कोई  इंसान  है  तो आपसे    ज़्यादा   दौलतमंद   और कोई नहीं .....

 अरशिया  ज़ैदी 





1 Jan 2013

Silent language of flowers


                फूलों  की  ख़ामोश  जुबां 






       " नया  साल   बहुत- बहुत मुबारक ..... ख़ुदा  करे  आपका  ये  साल    इन  रंग - बिरंगे ख़ूबसूरत   फूलों  की तरह महकता रहे ..... और हर  तरह  से   बेहद  कामयाब और  खुशियों  भरा  हो" .....


कैसे  लगे आपको  ये  फूल  जो मैंने आपके लिए भेजे है .....?   अच्छे  लगे  न ! आपको नए साल  की मुबारक बाद देने  के लिए  इससे बेहतर   तोहफ़ा  मुझे  समझ  में नहीं  आया।   


    क़ुदरत  ने  भी  क्या  ख़ूब  तोहफा दिया है  हमें .....    फूल अपनी  खामोश  जुबां  में,  इतने  असरदार   तरीक़े  से  हमारे   जज़बातो  और  फीलिंग्स  को सामने  वाले तक पंहुचा देते है जो  हम   अल्फाज़ो  में   भी नहीं  कह  पाते .  हम  कितने ही उद्दास हों , परेशान  हों  या  किसी  उलझन  में उलझे  हुए हों   जैसे ही  हमारी नज़र   इन रंग-बिरंगे  फूलों  पर पड़ती है , सारी  परेशानी  थोड़ी  देर के  लिए कही  गायब  हो जाती है .... और  इन फूलों  के साथ  मुस्कुराने  का दिल  चाहने  लगता  है।  ये  वो सबसे  ख़ूबसूरत  तोहफा होता  है  जो  कोई   ख़ूबसूरत  इंसान किसी  दुसरे   खूबसूरत इंसान को  दे सकता है .

  सही  रंग  के  फूल सही  रिश्ते के लिए चुन कर आप अपने रिश्ते  को नए  मायने  दे सकते है  .... दोस्ती  की एक   नई  शुरू वात  कर सकते है  लेकिन   ज़रा  ध्यान  से .... क्योंकी   अलग -अलग देशो  में   फूलों   के  रंगों  के  अलग -अलग मायने है ..... इसलिए  कही ऐसा न  हो की फूलों  के  ज़रिये  आप कहना कुछ और चाहते हो और   उसका मतलब उस देश में कुछ और  निकाला जाए .

रंग  -बिरंगे फूलों   का  जादू आज से नहीं  बल्कि  सदियों से   इंसान के सर पर चढ़  कर बोल रहा है  , इबादत  की जगह हो,  ख़ुशी  का मौक़ा  हो , घर  को सजाना हो ... या औरतों  का सजना- सवारना  हो , फूलो की ज़रुरत  हर जगह  ही पड़ती है , हमारी जिंदगी  को जहां  ये  अपनी  ख़ुशबू  से महका  देते  है , वही  ज़िन्दगी ख़त्म होने के  बाद  जनाज़े  या क़ब्र पर  श्रद्धाजली  देने  के  काम आते  हैं ।

फूल जाने -अनजाने  सोये  जज़बातो   को   जगाने  का काम  भी बख़ूबी  करते है I love you  कहने से अगर  ज़्यादा   बात नहीं बन पायी हो तो दिल छोटा मत कीजिये .....  हसीन  लाल गुलाब  के  फूलों  के  साथ   आपके दिल  की  बात  उन तक पहुचने  दीजिये .....ये  फूल बड़ी ही संजीदगी से  आप का हाल ए  दिल  बयाँ  कर   देंगे।
 फूलों  का  तोहफ़ा रूठो  को मनाने का  बेहतरीन  ज़रिया  है।  किसी अपने से लड़ाई हो  जाने  पर  सॉरी   कहना  मुश्किल  हो रहा हो   तो परेशान न हो  ... एक  ख़ूबसूरत  फूलों  का गुलदस्ता  ख़रीदिए  और पेश कर दीजिये  उन्हें .... यकीन जानिए गुस्सा  छु मंतर हो जाये गा .  इसी  तरह  अपने  प्यारे  दोस्त  को  depression  से  निकालने  और  बेहतर  महसूस  करवाने  के   लिए उसे  रंग बिरंगे  फूल   भेज सकते  हैं .....उन  फूलों  को देख  कर उसका  चेहरा  खिल  उठेगा , ना  सिर्फ  उसका   मूड   बेहतर   होगा  बल्कि  उसे  यह  भी महसूस होगा  की आपको  उसकी  परवाह  है .

 ये  फूल  मीलों  की  दूरियाँ  होते हुए  भी  दिल  की  दूरियां नहीं  बढ़ने  देते। अगर  आप  अपनों  से मीलों  दूर  है  तो  क्या हुआ,  आप  ऑन लाइन  फूलों  का  तोहफ़ा   भेज  कर   ना  सिर्फ   अपने  मोहब्बत  के  अहसास   को अपनो  तक  पहुचा सकते है   बल्कि   दूर  रहते  हुए  भी  रिश्तों  को   बेहतर   और  गहरे  बनाये  रख  सकते  हैं .
अपनों  को  सरप्राइज  करने  में  कितना मज़ा  आता है  न ? वो  भी  तब  जब उम्मीद  ना हो .... ख़ास  मौक़ों पर तो आप  फूल गिफ्ट कर ही सकते है  कभी -कभी  बिना किसी  ख़ास मौक़े  के  भी  फूल  दे कर देखिये ,सरप्राइज  होने वाले  की ख़ुशी  दोगुनी  हो  जायेगी .फूलो  का  तोहफ़ा किसी को भी दिया जा सकता  है ... चाहें  वो  माँ- बाप हों , टीचर  हो ,  भाई - बहन  हो दोस्त  हो,  या  रौबदार बॉस हो ..........  ये   तोहफा  एक  ऐसा  तोहफ़ा   है  जो  किसी   को   भी  दिया  जा सकता  है  और  सबके  दिल  को  भाता है

आप   फूल  किसको   दे  रहे  है, इस बात का  ख़याल रखना  बेहद  ज़रूरी है  की  जैसे  लाल  गुलाब के फूल  रोमांस  और मोहब्बत  के हसीं  जज़्बात  को  ज़ाहिर  करने वाला सबसे  असरदार रंग  है . इस  फूल के  साथ  लगे  काटें    प्यार  के रिश्ते  की  मुश्किलों और दिक्क़तो को  ज़ाहिर करते हैं , जो  कभी  आपके  जज़बातो  और  उम्मीदों  को घायल  करके  चोट  भी पंहुचा  सकते  है। यही  लाल  रंग  उस वक़्त  हमारे  गालों   को    सुर्ख़  कर देता है  जब   जज़बातो  की  गर्मी    गालों  तक पहुँचती   है। गुलाब की  पंखु ड़ी  को ज़रा ध्यान से देखिये ..... उसमे आपको  एक  शैडो  नज़र आएगी।  वो  आपके  पार्टनर  के  कभी  न बताये गए  "कल " को  ज़ाहिर  कर सकती  है। . और   उसी   पंखुड़ी को  अगर  आप सूरज की रौशनी  में   खड़े   हो कर  देखें   तो आपको  सिर्फ  और सिर्फ  इसकी खूबसूरती  ही नज़र  आएगी ..... जिसमे  आप  डूब जाना चाहेंगे . 

पीले  (Yellow )रंग  के फूल दोस्ती का   जज्बा ज़ाहिर करते है   कोई  इंसान  जो  आपको  अच्छा लगता है ,आप उससे  जान पहचान  बढ़ाना  चाहते  है , दोस्ती  करना  चाहते  हैं  तो आप  पीले रंग  के फूल  दे सकते है , क्योकि  पीला  रंग  दोस्ती  का रंग  है , सच्चाई,  ख़ुशी , उम्मीद , पाकीज़गी ,  और  कामयाबी का रंग  है

गुलाबी (Pink ) रंग   आपको  आपके बचपन  के दिनों  में  वापस  ले जाता है  इसको   बेबी  कलर भी कहते   हैं  इज्ज़त  तारीफ़  और  शुक्र  गुज़ारी  के ज़ज्बातो को ज़ाहिर करने  वाला  रंग  है .... गुलाबी  रंग . ये  मौज -  मस्ती का रंग है अगर आप  किसी की इज्ज़त करते है ,  उसकी तारीफ़  करते  हुए  उसे शुक्रिया  कहना चाहते है ...तो   बेशक गुलाबी  रंग  के  फूल पेश  किये जा सकते है .

   नारंगी (Orange) रंग    सूरज  से  मेल  खाता  है .  इसको  ज़िन्दगी  के जोश - खरोश  और  तमन्नाओ  से  जोड़  कर देखा  जाता  है  हम सब  की जिंदिगी में  कुछ  लोग  ऐसे होते है जो हम - ख़याल  होते  हैं  जिनसे मिलकर  हमें  अच्छा लगता है ... जिनके  साथ  वक़्त गुजारना  हमें  पसंद  आता  है  .वो   ना  सिर्फ  हमारी  हौसला -अफ ज़ाई    करते   है  बल्कि हमारा  जोश   भी  बढ़ाते  है , ऐसे  ख़ास  लोगो  को   नारंगी कलर के फूल गिफ्ट किये जा सकते है।

 सफ़ेद  (White ) रंग -पाकीज़गी , मासूमियत ,  और इन्किसारी( humility.) को  ज़ाहिर करता  है  जब  आप  सामने  वाले  को  अपने  इस  जज़बातो  से  रुबरु   कराना चाहें  तो   आप  रिश्ते की  शुरुवात  सफ़ेद  रंग  के फूल  दे  कर  कर सकते हैं।

 पीच(peach )  रंग 
 हमदर्दी,  शुक्र गुज़ारी  और  तारीफ का रंग है ... इस   रंग   के  गुलाब  आप  किसी   को तब  भेज सकते है  जब  आप  उसके  किसी  काम  की दिल से तारीफ  करना चाहते  हों . ये  रंग  ऑरेंज  और  पिंक  का मिला -जुला रंग  होता है जो  आपके  रिश्ते  के    कई  पहलू  को ज़ाहिर  कर सकता  है।

 
  ऊदा  (Purple) रंग   के  फूल  अपने   क़िस्म   के अकेले  फूल होते  है  जो   वफादारी, उम्मीद , फ़िराक दिली , और सोंच  की  clarity को  बताते  है  ये  रंग रोमांस  और लगन को तो   ज़ाहिर करता  ही है  साथ  ही  ये  भरोसा  और  ईमान  को  भी  ज़ाहिर  करता है  जो  किसी  भी  अच्छे  रिश्ते  के  लिए  ज़रूरी   होता है।  अपने  पार्टनर  को   पर्पल  कलर के   lavender  या orchid   फूलो का तोहफा दीजिये ...... जरा उन्हें भी तो पता चले
कि   आपकी  नज़र  में  ये  रिश्ता कितना  ख़ास  और कितना  अहम है।

      इसके  अलावा  दो रंगों के ख़ास  मिले -जुले  फूल  एक अलग  ही सन्देश  देते है  जैसे  Yellow  और  Red . मुबारकबाद  का  सन्देश  देता है  तो वही  सफ़ेद और लाल  रंग  के  मिले -जुले फूल  एकता   को  ज़ाहिर  करते   है  ऐसे  फूल अक्सर engagement  पर दिए जाते हैं। इसके  अलावा  Yellow   और  Orange -  रंग के मिले -जुले फूल  भेजने वाले  के passionate  thoughts  को जताता है।
तो देर किस बात की है , मौक़ा  भी है  दस्तूर  भी है ..... अपने रिश्ते  को  ध्यान  में रखते हुए .... फूलो  को चुनिए  और  भेज  दीजिये .....उनको  जिनसे  आप  कुछ कहना चाहते है .

अरशिया  ज़ैदी 









































 

  













29 Dec 2012

A tribute to her............

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                     बुझती  आखों  का सुलगता  पैग़ाम 


 गैंग  रेप  के हादसे  की  शिकार   वो   मासूम लड़की  आज  12 दिन  के  बाद ज़िन्दिगी  की  लड़ाई  हार गयी  और  सिंगापुर   के  माउंट   एलिज़ाबेथ  अस्पताल  में  उसने  दम  तोड़  दिया। सुबह -सुबह  मिली  इस खबर ने  पूरे  देश को  हिला कर   रख दिया  है ....  आज  हर  हिन्दुस्तानी की  आखों में आँसू  है. इस वक़्त  ऐसा लग रहा  है  की  जैसे हर  घर  से एक बेटी,  एक  लड़की  की मौत  हुई है .....  
होश में आते  ही  उसने  अपनी  माँ  से  एक ही सवाल  पूछा  था ...... क्या  उन दरिंदो को  सज़ा  मिली ?   इस  हादसे  के बाद  मौत  से जूझते हुए शायद  कुछ  ऐसे  जज़्बात  रहे होंगे.......


नक़ाब  चहेरो  से  ए  ज़ालिमो  उठाऊंगी 

दरिंदगी  की  कहानी  भी  मैं   सुनाउंगी.

मैं  हिन्दुस्तान  की  बेटी  हूँ,  इसलिए सुन लो 
मैं  बुझती  आखों  से  भी  इंकलाब  लाउंगी .

तुम्हारी  सोंच  को  लोगो  बदल  भी  सकती हूँ 

मैं  इस  समाज  में  गिर  कर  संभल  भी  सकती  हूँ .

तुम्हें  भी न्याय  मिले  इसलिए  मेरी  बहनों 

मैं  मर  के  देश  की सूरत  बदल  भी  सकती हूँ. (Written by  Mr. Hilal Ali Zaidi)
अरशिया  ज़ैदी 

22 Dec 2012

insaaf ka intizaar


                                   इंसाफ  का इन्तिज़ार 

फिछले  हफ्ते  वो  गैंग  रेप  का शिकार हुई  और अब  हॉस्पिटल में  जिंदगी  और मौत  के बीच जंग  लड़  रही  हैबेहद  तकलीफ़  में  है ,उसके पेट और चेहरे पर  गहरी  चोटे आयी  है .पाँच सर्जरी के बाद भी  उसकी हालत नाज़ुक  बनी  हुई  है। 
उसे  और उसके दोस्त  की बहादुरी  को  हमारा  सलाम  जिन्होंने  आख़िर  तक  उन  हैवानों  का मुक़ाबला  किया। आज  उनके  साथ  हुई  हैवानियत   के  खिलाफ   पूरा  देश  उनके  साथ  खड़ा है , इंडिया  गेट , राज पथ ....पर  हज़ारों  की  भीड़   इकठ्ठा  होकर  उनके  लिए  इंसाफ मांग रही हैं    
सब  उसके  ठीक  होने  के लिए  दुआ  कर रहे है ,.....   वो एक  fighter  है,  ठीक  होकर  इज्ज़त और  शान  के  साथ  अपनी ज़िन्दगी  जियेगी.....उसकी  ज़िन्दिगी  पहले से ज़्यादा  ख़ूबसूरत  और  कामयाब हो .... यही  हम सब की दुआ है .
जो  उसके  साथ हुआ  वो बेहद  दर्द नाक  और दिल को हिला  देने वाला हादसा  है, जिसके  लिए कोई  सज़ा  काफी  नहीं . ऐसे   गुनाहगारों  को  हर  दिन  तिल - तिल   मरने की सजा मिलनी   चाहिए. इन्हें इस  लायक  ही  नहीं  छोड़ना चाहिए  की  ये  फिर  किसी  लड़की  से sexual relationship  बना  सकें। इनको  मिलने  वाली सज़ा  इतनी दर्द  नाक होनी  चाहिए  जो  लोगो  को  हिला  कर  रख  दे  और एक ऐसा डर  पैदा  कर  दे  की  कोई भी  ऐसी   हरक़त  करने   की सोंच  भी न सके . जब तक लोगो के अंदर  डर  नहीं होगा ....  ऐसे क्राइम   बार  - बार  होते रहेंगे  और  गुनाह गार  बेखौफ़  होकर सड़को  पर  घूमते  रहेंगे 

 सबसे   बड़ी  कमी  तो हमारे   सिस्टम की  है  जिसमे  सरकार , प्रशाशन  और  पुलिस   जो  अपनी   ज़िम्मेदारी  ठीक  से  नहीं  निभाते .... और पब्लिक  की  हिफाज़त  करने में पूरी तरह  नाकाम है .     वही  हमारी  सोंच  भी  कोई  कम ज़िम्मेदार  नहीं  है क्योकि  हम हर हाल  में  औरत को  ही  दोष  देते  है , उसकी  ही  ग़लती  निकालते है .... रेप  केस  में   हादसे  की शिकार   लड़की को  बेहद  insensitivity  से  डील  करते  है।..... जैसे  गुनहागार  वो  लड़की  ही हो . यहाँ  हमें भी   अपनी  सोंच बदल कर  ऐसे केस  में  औरतों  के साथ बेहद प्यार, इज्ज़त और हमदर्दी  भरा  सुलूक  करने  की  ज़रुरत  है .... ताकी वो  जल्दी  से  जल्दी उस trauma से बाहर  आ  सकें 
 ये  पहला  रेप  केस  है  जिस  पर  इतनी  तवज्जो  दी जा रही है..... औरतो  की हिफाज़त  के  लिए ठोस   क़दम  और  कड़े  कानून बनाने  की  बात  चल रही है .....( काश  अमल भी हो !)..अब  देखना  ये  है  की अमल  कैसे  और  कितना  किया जाता है  जिससे   देश  भर  की  लडकियां  महफूज़  हो  सकें  और बेफिक्र  होकर ... बिना किसी  डर  के सड़को  पर निकल  सकें .
अरशिया  ज़ैदी







11 Dec 2012

aage bhi jaane na tu peeche bhi jaane na tu

        
आगे भी  जाने  न   तू , पीछे भी जाने न तू .....
  जो  भी  है  ....बस  यही  एक पल है...

कितनी  बड़ी सच्चाई   छुपी है  फ़िल्म  वक़्त  के  इस  गीत में , जिसे साहिर  लुधियानवी  ने  फिल्म  वक़्त के लिए 1965 में लिखा था. ये सदा बहार  गीत  हर दौर  में  जीने  का  सही  तरीक़ा  बताता  है।

अपने  आस -पास  नज़र  दौड़ाइए  आपको ऐसे   कई लोग दिख जायेंगे  जो  हर  पल  अपनी  ज़िंदगी  में   ताज़गी   और  नएपन  को बरक़रार रखते  हुए , नई- नई  activities  करते  रहते है,  अपने  अंदर  कुछ न  कुछ  नया  शौक़  तलाश  कर  उन्हें  पूरा  करते रहते  है  और  ख़ुश  रहने  की वजह  ढूँढ  लेते  हैं। 

हर  दिन  अपने अंदर  कुछ  नया  ढूँढने  का  नाम  ही तो  है..... ज़िंदगी . बहते  पानी की तरह   ज़िंदगी    के  हर मुकाम  पर  चलते रहना  और  अपने  अंदर नई - नई    खूबियों  और सलाहियतों  को   तलाश  कर उन को  निखारने  की  कोशिश  करते  रहना   ही  एक  कामयाब जिंदिगी  का  मकसद होता  है। जो  जिंदिगी  को जीने  के सही  मायने  देता है . 

जिस लम्हा  हम   रुक  जाते है   और   ये  मान  बैठते  है .... अब   नया  करने  या सीखने के लिए कुछ नहीं बचा है   तो समझ  लीजिये  वही से    डिप्रेशन  में  जाने की शुरुवात  हो जाती  है..... बोरियत  हमें  घेरने  लगती है,  और  वक़्त  काटे  नहीं कट  पाता .शायद  यही  वजह है  की  आज  लोग  अपने शौक़  को  अपना  प्रोफेशन बना रहे है , लगी -लगाई  अच्छी - भली   नौकरियाँ  छोड़  कर वो   काम   कर रहे हैं जो  वो  करना चाहते है .... जिसको करने से उन्हें ख़ुशी  मिलती है। जब आपका  शौक़   आपका  प्रोफेशन  बन  जाता  है  तब  काम करने  में  एक अलग ही मज़ा आता है।

आज दुनिया  में वही लोग सबसे  ज्यादा  कामयाम  हैं   जिन्होंने  वक़्त  और  हालात  के साथ  खुद को बदलने  की   हिम्मत  दिखाई  है   चाहें  वो  लेटेस्ट  टेक्नोलॉजी   को सीखने  की लगन और  जोश  हो .... या रिश्तो  और रोज़ मर्रह  की ज़िन्दिगी  में  वक़्त और हालात  के साथ  ख़ुद  को ढाल  लेने का हुनर!

आपको  पता  है  अपनी जिंदिगी  की रोज़ - मर्रह की  उलझनों और परेशानियों  से बचने का भी  ये  बेहद  कारगर नुस्खा  है  अगर  आप  अपने  आप को  कामो में बिज़ी  रखते  है  और  अपने दिमाग को  इतनी फुर्सत  नहीं लेने देते  की  वो  फुज़ूल की  बातें  सोच सके ...  तो समझ लीजिये की आप ने   सही  राह  पकड़ी  हुई  है .
अक्सर  हम   अपने  प्लान्स को आगे  के लिए मुल्तवी  करते  है .... की जब ये हो जायगा तो  वो  करेंगे ... और वो हो जाएगा तो ये करेंगे .... हम  सही वक़्त का इन्तिज़ार करते रहते  है  जो  की कभी नहीं  आता ..... सही वक़्त  "आज" और "अभी" है  जिसे  हमें  हमेशा  याद रखना  चाहिए।  

माँ - बाप  अक्सर  अपने  बच्चों   के  सेटल  होने  का इन्तिज़ार  में  अपने  प्लान्स  को  पीछे   रखते  है , हो सकता है  की  कुछ  ख़ास  चीज़े  या  कुछ ख़ास काम  करने  के लिए सही वक़्त न  आया  हो  लेकिन उसका ये मतलब बिल्कुल  भी नहीं  होना चाहिए  की आप अपने अंदर  ख़ुआबो  और   ख़ु हाहिशो  को  न  पलने  दें  बल्कि  अच्छा   यही  होगा  की  आप उन्हें  हर लम्हा  जिंदा  रखें  ताकी वक़्त आने पर उन्हें  पूरा  किया जा सके।

"आज"  और "अभी"  में  जी  कर  आप  अपनी एक छोटी  सी  लव  स्टोरी  में  अपने  पार्टनर  के साथ   बिताये गए,  कुछ लम्हों में  एक उम्र  जी लेते  है  ... ...वक़्त  और हालात  भले  ही  आपको   ज़्यादा  दूर तक  साथ  न चलने  दे  , लेकिन तब आपको ये  तसल्ली  तो  होती  है   की आपने  अपने दिल के  बेहद  क़रीब  एक रिश्ते को  बहुत थोड़े  से  वक़्त  में  बेहद ख़ूबसूरती  से  जी लिया।  अपने   फुर्सत  के  लम्हों  में  आप  उन  अनमोल लम्हों  को याद  करके थोडा  सा  सुकून  तो  महसूस  कर  पाएंगे  की..... आपने   उन  चंद   हसीन  लम्हों में  ही  अपने  ... . प्यार  भरे रिश्ते  को   उम्र  भर  के  लिए  जी लिया  जो  एक ख़ुश नुमा याद बन कर  ताउम्र  आपके  साथ  रह  सकता  है . 
  
अपनी जिंदिगी को  बासी  पन  से  हमेशा  दूर  रखें ..... उस तरह से  ना  जीते   रहे  जैसे जीते  आयें है और न ही  एक  ही तरीक़े  से  काम करते  रहने की  कोशिश  करें .अपनी जिंदिगी में  आ रहे बदलाव  को खुली  सोच  और खुली  बाहों   से कुबूल  करें। हमारी  जिंदिगी हमें   बार बार इशारे करती है .....समझाती   है  की  हम  अपनी  सोंच  और  काम करने के  तरीकों  में   नया पन लाएं और  उसे  अपनाने  के लिए  अपने अंदर सलाहियत पैदा  करें।  हर दिन    बढती उम्र  और  नज़दीक  आते बुढ़ापे  में अगर एक स्टाइल  हो .... एक अंदाज़ हो .... तो क्या बात है!!!

अरशिया  ज़ैदी 








6 Nov 2012

Manoj Baajpai

                मनोज  बाजपाई....एक बेमिसाल  एक्टर  




एक्टर मनोज बाजपाई  की एक्टिंग  की मैं  तब से  फैन रही  हूँ  जब से मैंने उन्हें  महेश  भट्ट के टी-वी  सीरियल  स्वाभिमान  में  सुनील का किरदार  निभाते हुए देखा था , हमेशा  से एक  अलग   छाप  छोड़ी है   उन्होंने , अपने  निभाए  हर किरदार  में,  आज उनकी   फिल्मे .... गैंग ऑफ़ वासेपुर  और  चक्रविहू   देश  विदेश  में  खूब तारीफें  बटोर रही हैं .   
अपने   पसंदीदा एक्टर  की   ये   कामयाबी,  ये  शोहरत   मुझे  भी   बेहद  अच्छी  लग रही  है   लेकिन दिल  में  इस  बात  का  मलाल  ज़रूर है  की  मनोज बाजपाई जैसे   बेहेतरीन  एक्टर   को   काफी  देर से  नोटिस  किया  गया है  जो अहमियत  उन्हें आज मिल रही है  वो  काफी  पहले   मिल  जानी  चाहिए थी  जबकी  वो  सत्या, शूल (1999) ,दिल पे मत ले  यार 2000, ज़ुबैदा , अक्स 2001  रोड 2002, पिंजर 2003 ,वीर ज़ारा 2004, राजनीति 2010  जैसी  फिल्मो में... एक  के बाद  एक. बेहतरीन  पर्फोर्मंसस   देते रहे   हैं  और  जिसके  लिए उन्हें कई   बड़े - छोटे अवार्ड  से  लगातार नवाज़ा  जाता  रहा  है।     

  हिंदी  फिल्मों  में  लीक  से  हट कर  बेहेतरीन  किरदार  निभाने वाले   मनोज  बाजपाई को   वो तवज्जो   नहीं   दी गयी  जो उन्हें देनी चाहिए थी . देश - विदेश  में  धूम  मचाने  वाली  उनकी  फिल्म  गैंग  ऑफ़   वासेपुर  जैसी   क़ामयाब  फिल्म देने के बाद  जब  वो  Wills Indian  Fashion Week  में    रैंप  पर  चले तो हर कोई उन्हें अपने  कैमरे  में  कैद  करने को बेताब हो रहे  था  जबकि   एक वक़्त  वो था  की जब वो मुंबई में  ऐसिड  फैक्ट्री   के लिए, और दिल्ली  में  फिल्म  जेल के लियें   रैंप  पर  चले  थे तब न तो किसी ने उन्हें  नोटिस  किया  और न ही किसी ने  किसी ने  उन्हें   क्लिक  करना चाहा  था।

  लेकिन कुछ  लोग  पैदाइशी   एक्टर  होते हैं जिन्हें  कामयाबी  के आसमान  पर  चमकने  से कोई  नहीं रोक  सकता . मनोज  बाजपाई  ऐसे ही लोगो में से  एक हैं . दिल्ली  के   नेशनल स्कूल ऑफ़  ड्रामा  से   चार बार रिजेक्ट  होने  के बाद   उन्होंने   बेरी  ड्रामा ऑफ  स्कूल में   बेरी  जॉन  के  साथ  थियेटर   किया ....  जहां   सुपर स्टार  शाहरुख़  खान   उनके  क्लास मेट थे . खुद  के टैलेंट  पर   यक़ीन  रखने वाले मनोज बाजपाई  को बेरी  जॉन  ने  हमेशा  एक  बेहतर एक्टर  और बेहतरीन  शागिर्द  क़रार  दिया था . 
अपने करियर  में  उन्हें,  फ़िल्मी दुनिया की कई  कड़वी  हक़ीक़तो  का सामना  करना  पड़ा जहां  उन्हें  ये पता चला  की  अवार्ड  परफॉरमेंस  के लिए नहीं  बल्कि   रसूक  वाले   लीडिंग  एक्टर्स  को,  जीताने  के  लिए  भी  दिए  जाते  है  . एक  बार  उन्हें  बेस्ट एक्टर  अवार्ड के लिए  चुना  गया  था,  उसमे  एक  दूसरे  लीडिंग  एक्टर का   नॉमिनेशन  भी  था .जूरी  ने एक तरफ़ा  फैसला   सुनाते  हुए  उनसे  कहा    ......"की  आपको तो पता है की विनर  कैसे चुना गया है। मनोज  आप विनर नहीं हो ..... और जूरी  ने ये  तय  किया है की  अवार्ड  मेन   स्ट्रीम   के उसी एक्टर  को  दिया  जायेगा . क्योकि उसे पहली बार  एक्टिंग  के लिए  अवार्ड मिल रहा  है....इसलिए उसे  ये मौक़ा दिया जाना चाहिए,  उसने  इस फिल्म में बड़ी  मेहनत  से काम किया है . मनोज तो एक्टर है , एक्टिंग करेगा ही .....आज नहीं तो कल उसे अवार्ड मिल ही  जायेगा " इस वाक़ये  ने  उनके  अवार्ड  लेने  की ख़ुशी को  कही न कही  कम ज़रूर  कर  दिया . 

  इसी  तरह  सालों  पहले,  उनकी  फिल्म,  सत्या  को ऑस्कार अवार्ड  में न भेज कर जींस जैसी फिल्म को ऑस्कर  के लिए  नॉमिनेशन  दे  दिया  गया  था, इसलिए  अब,  जब  उनकी फिल्म  गैंग ऑफ़ वासेपुर  के  ऑस्कर  अवार्ड्स के लिए  nominate  किये  जाने  की  ख़बरे  ज़ोरों  पर  हैं  तब  वो कोई  ख़ास  उम्मीद  नहीं  रख   रहे हैं।   



बिहार  के  छोटे से  ग़ाव  बेलवा  से ताल्लुक़  रखने वाले   इस  बेमिसाल   एक्टर  ने  अपनी  शुरू वाती  दौर की   पढ़ाई   बेतिया  के,  के . आर  कॉलेज से  पूरी की  और  फिर दिल्ली  के   रामजस  कॉलेज से  इतिहास   में  ग्रेजुएशन  करके  कुछ  वक़्त के लिए दिल्ली  के सलाम बालक  ट्रस्ट में  पढाया।  फिल्मो में  अपने  करियर  के शुरुवाती दौर  में  उन्होंने  फिल्म  द्रोह काल  और बेंडिट  क्वीन(1994 ) में    छोटे छोटे  रोल  किये .1996  में  वो  फिल्म दस्तक में  मुकुल देव और सुष्मिता सेन के साथ एक छोटे से रोल  में  नज़र  आये .फिल्म  सत्या  के  बाद   वो कामयाबी  की सीढियां  चढ़ते  चले गए। आज  मनोज  बाजपाई  की फिल्मो को  न  सिर्फ अपने देश में बल्कि  विदेश  में भी बेहद  तारीफ  और  शोहरत  मिल रही है..... जो इंशाल्लाह  आगे  भी  जारी रहेगी 




मनोज  बाजपाई ने  अपनी  पहली  शादी  नाकाम  होने के  बाद  2005 में  फिल्म  एक्ट्रेस   नेहा  उर्फ़ शबाना रज़ा को अपनी जिंदिगी का  हमसफ़र  बनायाजिनके साथ  वो  खुश हाल  शादी शुदा  जिंदिगी बिता रहे है। अब वो  एक  नन्ही   सी  परी  के  पापा भी  हैं जिसे  यकीनन अपने एक्टर  पापा  पर  नाज़  रहेगा ..... हमेशा ... हमेशा !!!    

अरशिया  ज़ैदी